क्यों न मर्डर का केस चले कोर्ट और जज पर !

कोर्ट पर केस चले यह गैरवाजिब सवाल हो सकता है। पर सच है। कोर्ट पर मर्डर का केस चलना चाहिए क्योंकि उसने पेड़ काटने का आदेश दिया है। वजह साफ है पेड़ जिंदा जिव है। जिंदा जिव को मारना जुर्म है।

मुंबई की आरे कॉलोनी में शुक्रवार रात से शुरू हुई पेड़ों की कटाई पर सियासी घमासान छिड़ गया है। एक ओर पर्यावरण प्रेमी यहां डटकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, दूसरी ओर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।

कोर्ट का फैसला आते ही पेड़ों की कटाई होने पर राज्य में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने भी तीखा हमला बोला है। पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे ने इस मामले में प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी को शर्मनाक बताया है। वहीं, आरे पहुंचने से पहले ही पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया है।

मुंबई के आरे कॉलोनी में पेड़ों को काटने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कल (सोमवार) सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच सुबह 10 बजे इस मामले में सुनवाई करेगी. आज यानी रविवार को छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आरे में पेड़ों के काटे जाने के खिलाफ याचिका दायर की. उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मामले में तुरंत सुनवाई करनी चाहिए और पेड़ों के काटने पर रोक लगानी चाहिए.

यह याचिका लॉ स्टूडेंट रिशव के जरिए दायर की गई है. उन्होंने कहा कि पेड़ों को काटने से रोकने की लड़ाई में अभी हार नहीं हुई है. चीफ जस्टिस की कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले छात्रों के प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इस मामले में अपील करने के लिए समय नहीं है. लिहाजा चीफ जस्टिस से गुहार लगाई गई है.

छात्रों ने सीजेआई को लिखे पत्र में अर्जेंट पिटीशन पर सुनवाई की गुहार लगाते हुए कहा है कि 4 अक्टूबर से गैरकानूनी तरीके से पेड़ों का काटा जा रहा है. शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में ले लिया गया है. वे आज तक ऐसा कर रहे हैं.

पत्र में दावा किया गया है कि आरे में वह सबकुछ है, जो जंगल के लिए जरूरी होता है. मुंबई मेट्रो के शेड निर्माण के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है. छात्रों का दावा है कि उन्होंने कई जगहों पर इस आदेश को चुनौती दी और परियोजना के लिए अन्य स्थान भी सुझाए. इसमें दावा किया गया है कि शेड निर्माण के लिए प्रस्तावित मीठी नदी के किनारे आरे के 33 हेक्टेयर भूभाग में 3500 से अधिक पेड़ हैं. इनमें से 2238 पेड़ काटने का प्रस्ताव है. ऐसा हुआ तो मुंबई पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा.

22 thoughts on “क्यों न मर्डर का केस चले कोर्ट और जज पर !

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