केवल VIP’s के लिए है “शांति-सेवा-न्याय” व्यवस्था

Sunil Misra New Delhi :-  आज के युग में गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला पुलिस विभाग तो ऐसा लगता है कि अब केवल VIP केस ही सुलझा सकती है आम आदमी तो केवल फ़क़ीर बनकर थाने के चक्कर ही लगाता रहता है और फिर हार कर ऊपर वाले के भरोसे अपने साथ हुए अनहोनी को होनी में बदलने का इंतज़ार करता रहता है आज आम आदमी के साथ जो थाने में दुर्व्यवहार होता है और छोटी छोटी बातों पर पुलिस थाने उठा कर ले आती है और सारे दिन थाने में बिठा कर रखती है फिर डील करके छोड़ दिया जाता है I लेकिन देखने वाली बात ये है की जब किसी के बच्चे कालोनी से गायब हो जाते है तो उनकी फिर तक नहीं लिखी जाती और नन्हे डॉट डपट कर थाने से भगा दिया जाता है और दो दो महीने जांच भी नहीं होती I पुलिस घर भी पूछने नहीं आती I किसी की बीबी गायब कर दी जाती है पुलिस कोई सुनवाई नहीं करती उसकी फाइल भी गायब हो जाती है ७-८ महीने चक्कर काटता रहता है I ये है दिल्ली पुलिस I
वहीँ पर एक VIP केस के पीछे 700 पुलिसकर्मी, 200 CCTV फुटेज, २४ घंटे के अंदर सुलझा लिया जाता है ये क्या प्रधान मंत्री का फोन था या पुलिस विभाग को PM का खौफ. आखिर पुलिस चुस्त दुरुस्त हमेशा क्यों नहीं रहती I गरीबों के परिवार के बच्चे क्यों नहीं ढूढती क्या उनके पास पैसा नहीं है इसलिए, या पावर नहीं है इसलिए, या उनके साथ कोई सांसद, विधायक, पार्षद नहीं है इसलिए I
सोचने का विषय ये हैं की पुलिस अपना काम ईमानदारी से क्यों नहीं करती और गृहमंत्रालय क्या इस बात से खुश है की हमारे प्रधानमंत्री की भतीजी का केस सुलझा कर वाहवाही लूट रही है I मै समझता हूँ की गृहमंत्रालय को खुद भी आम आदमी की तरफ ध्यान देने की पुरजोर कोशिश करना चाहिए ये गलत धारणा हटा देनी चाहिए की VIP का काम २४ घंटे में, गरीबों और आम आदमी का काम सालों में भी नहीं सुलझता I

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