चाँद की सफलता के बीच साराभाई

Netvani Desk : भारत चाँद पे जा चूका है और हीलियम लाने की बात कर रहा है और हीलियम आने से हमारे देश में ईंधन की समस्या से निजात मिलेगी और इसके साथ ही हम अब मंगल पे जाने की बात कर रहा है लेकिन इन बुलंदियों तक हमे किसने पहोचाया और इस्सकी शुरुआत कहा से हुई  .

डॉ विक्रम साराभाई वो व्यक्ति है जिनको अंतरिक्ष का जनक माना जाता है विक्रम साराभाई ने ही भारत में इसरो की नीव रक्खी और भारत को स्पेस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई .

भारत आज अंतरिक्ष मिशन में पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है 22 जुलाई को भारत ने चंद्रयान-2 लॉच कर अंतरिक्ष में एक नई छलांग लगाई है . डॉ विक्रम साराभाई को देश के महान वैज्ञानिक और स्पेस के जन्मदाता के तौर पे जाना जाता है . भारत रत्न से सम्मानित और हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जिनको हम सब मिसाइल मैन कह कर पुकारते है वो भी विक्रम साराभाई की ही देन है विक्रम साराभाई ने ही अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन बनाया था  .

आज उन्ही महान वैज्ञानिक डॉ विक्रम साराभाई की 100वी जयंती है भारत के आजाद होने के बाद उन्होंने 1947 में फिजिकल रिसर्च लैबरेटरी (पीआरएल) की स्थापना की . पीआरएल की शुरुआत उनके घर से हुई . बंगले के एक कमरे को ऑफिस में बदला गया जहां भारत के स्पेस प्रोग्राम पर काम शुरू हुआ . 1952 में उनके संरक्षक डॉ.सीवी रमन ने पीआरएल के नए कैंपस की बुनियाद रखी . उनकी कोशिशों का ही नतीजा रहा कि हमारे देश के पास आज इसरो (ISRO) जैसी विश्व स्तरीय संस्था है .

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) की स्थापना विक्रम साराभाई की महान उपलब्धियों में एक थी . जिसके लिए उन्हें 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था.
अंतरिक्ष की दुनिया में भारत को बुलन्दियों पर पहुंचाने वाले और विज्ञान जगत में देश का परचम लहराने वाले इस महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की मृत्यु 30 दिसंबर, 1971 को कोवलम, तिरुवनंतपुरम, केरल में हुई थी.

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