रेमॉन मैग्सेस अवार्ड चाल या जाल

दीपक पांडेय :  रेमॉन मैग्सेस अवार्ड जो की दूसरे विश्व युद्ध के बाद फ़िलीपीन्स के तीसरे और देश के कुल सातवें राष्ट्रपति के नाम पर दिया जाता है जिनका कार्यकाल 30 सितम्बर 1953 से 1957 तक रहा. लेकिन ये संचालित होता है अमेरिका द्वारा. 1957 मैं जब इसकी शुरुआत की गयी थी तब ये रॉकेफेलर ब्रदर्स फण्ड द्वारा संचालित होती थी लेकिन अब इसकपर अपरोक्ष रूप से फोर्ड फाउंडेशन और सीआईए की पकड़ है | इस अवार्ड को एशिया महादेश का नोबेल पुरुस्कार भी कहा जाता है | जो की सात विभिन्न क्षेत्रों में किसी व्यक्ति या संगठन को उनके उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए दिया जाता है |

सात विभिन्न क्षेत्र जिनके लिए ये अवार्ड दिया जाता है वो इस प्रकार हैं

1. सरकारी सेवा (1958 – 2008)

2 . सार्वजनिक सेवा (1958 – 2008)

3 . सामुदायिक नेतृत्व (1958 – 2008)

4 . पत्रकारिता, साहित्य और रचनातमक संचार कला (1958 – 2008)

5 . शान्ति और अंतर्राष्ट्रीय समझ (1958 – 2008)

6 . एमरजेंट लीडरशिप (2001 -) 7) अवर्गीकृत ( 2009 -)

अब बात करते हैं इसके कुछ खास पहलू पर, फ़िलीपीन्स के पूर्व राष्ट्रपति रमन मगसायसाय को निधन भी एक विमान दुर्घटना में हुआ था भारत के होमी भाभा जहांगीर की तरह | एशिया महादेश का नोबेल पुरुस्कार कहा जाने वाला ये अवार्ड अभी तक ज्यादातर सिर्फ विकासशील या अर्ध विकासशील देशों को ही दिया गया है मतलब साफ है जहाँ आप आसानी से जोड़ तोड़कर के सरकार बना सकते हैं, गरीबी और लाचारी दिखा सकते हैं, मानवता श्रेणी कम दिखा सकते हैं,दंगे और पिछड़ापन बता सकते हैं | यानि की हर उस हथियार का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे की कोई भी बाहरी कम्पनी वहां पैसा न लगाए दुनिया में उस देश को पिछड़ा और गरीब साबित कर के वहां कन्वर्ज़न को धंधा आसानी से फल फुल सकता है |
2006 में ये अवार्ड अरविन्द केजरीवाल को दिया गया था , उन्होंने भ्रस्टाचार के खिलाफ अण्णा आंदोलन को क्या हाल किया किसी से छुपा नहीं है, रही बात दिल्ली को सिंगापूर बनाने की तो वो भी कब लन्दन बन गयी खुद दिल्ली वालों को पता नहीं चला | एक दौर वो भी था जब अमरीका के ही फोर्बेस पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 500 ताकतवर नेताओं की लिस्ट में जगह दे दी थी | ये वही केजरीवाल है जो खुल कर खालिस्तान और पाकिस्तान को समर्थन करता है, JNU टुकड़े गैंग के खिलाफ आज तक चार्ज शीट इसकी सरकार ने दाखिल नहीं की है | AAP पार्टी के फाउंडर मेम्बर और सुप्रशिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने भी केजरीवाल पर नक्सलियों के साथ सांठ गांठ के आरोप लगाए हैं |

अब आते हैं नए नवेले अवार्ड विजेता रविश कुमार पर जाती पूछ कर पत्रकारिता करने वाले इस पत्रकार को मैं लगभग पिछले 08- 09 सालों से देख रहा हूँ, इनके काम में कोई खास बात नज़र नहीं आती सिवाय इसके की ये हर बात में नकारात्मक छवि ढूंढ लाते हैं , ये वही पत्रकार हैं जिनके अपने भाई सेक्स रैकेट चलाने और बहन रिश्वत के आरोपी हैं खुद उन्होंने अपने बंग्लो के लिए UPA सरकार में सरकारी जमीन के दुरपयोग के लिए स्पेशल परमिशन लिया हुआ है | जब मैं इनकी पत्रकारिता देखता था तो मुझे समझ में नहीं आता था उस वक़्त की इस सख्श को हर जगह नकारत्मकता ही क्यों दिखाई देती है लेकिन अब समझ में आया इसका कारण |

कुल मिलाकर कहा जाये तो ज्यादातर ऐसे लोगों को ये अवार्ड दिया जाता है जिन्होंने हिन्दू धर्म या देश की नकारात्मक छवि विश्व मंच पर दिखाने की कोशिश की है और कोई भी देशभक्त ऐसा तो नहीं कर सकता |

अगर इस लिस्ट में बरखा दत्त और राजदीप सरदेसाई को भी नाम होता तो कोई बड़ी बात नहीं थी | ऐसे ही अगर आप समाज सेवी कहे जाने वालों के लिस्ट पर ध्यान देंगे तो पता चलेगा की कब समाज सेवा करते करते ये करोड़पति बन गए पता ही नहीं चला जिनमें से ज्यादातर क्रिप्टो क्रिस्चियन हैं ये वो प्रजाति है जो जन्म से तो हिन्दू हैं लेकिन आगे जाकर पैसों के लालच में क्रिस्चियन धर्म अपना लेते हैं लेकिन समज में हिन्दू नाम से रहते हैं, किन्तु ये सभी आपको टीवी चैनल या दूसरे सार्वजनिक कार्यकर्मों में हिन्दू धर्म और देश को गाली देते हुए मिल जायेंगे |

इन सबको देखकर रविंद्र नाथ टैगोर की याद ताज़ा हो जाती है जिन्हे नोबेल पुरुस्कार तो इंग्लैंड के महाराज जॉर्ज पंचम के भारत आगमन पर लिखे गए गुणगान जन,गण,मन भारत के भाग्य विधाता के लिए दिया गया और बहाना उनकी किताब गीतांजलि को बनाया गया जिसमे नोबेल पुरुस्कार जैसी कोई बात थी भी नहीं इसी इंग्लैंड के महाराज के गुणगान को आगे चलकर नेहरू ने भारत का राष्ट्र गीत घोषित कर दिया| जिसका जिक्र बाद में खुद रविंद्र नाथ टैगोर ने अपने बहनोई सत्येंद्र नाथ बनर्जी को लिखे खत में किया था जो की उस वक़्त के इंग्लैंड में ICS अफसर थे |

इस लेख में दिए गए विचार लेखक के खुद के हैं। इस विचार से संस्था NETVANI का कोई संबंध नहीं है।

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