एस्टेरॉयड के टक्कर से तो खत्म हो जाएगा देश.

सौरमंडल में छोटे बड़े हजारों खगोलीय पिंड मौजूद हैं, जिन्हें एस्टेरॉयड के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र को एस्टेरॉयड क्षेत्र के नाम से जानते हैं। इनमें एक खगोलीय पिंड तो 950 किलोमीटर के व्यास का भी है। एस्टेरॉयड सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाता है। हमारे सौरमंडल में करीब एक लाख एस्टेरॉयड मौजूद हैं, जो अलग-अलग आकार के हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने 2006 क्यूक्यू 23 (2006 QQ23) नाम के एक ऐसे एस्टेरॉयड का पता लगाया है जो 10 अगस्त को धरती से टकरा सकता है।वैज्ञानिकों ने 21 अगस्त 2006 को पहली बार इस एस्टेरॉयड का पता लगाया था। तब भी इसके धरती से टकराने की आशंका जताई गई थी।

हिडाल्गो, हर्मेस, ऐरोस नामक क्षुद्रग्रह तो पृथ्वी से कुछ लाख किलोमीटर की ही दूरी पर हैं। ऐरोस एक छोटा क्षुद्रग्रह है जो कक्षा से भटक गया है तथा हर सात वर्षों के बाद पृथ्वी से 256 लाख किलोमीटर की दूरी पर आ जाता है। इसकी खोज 1898 में जी विट ने की थी। इस बार भी धरती निशाने पर है। वैज्ञानिक चिली स्थित दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन के जरिए इस पर नजर बनाए हुए हैं।  वैज्ञानिकों ने तब लगातार 10 दिनों तक इस पर नजर रखी थी। यह धरती के काफी करीब आ गया था। लेकिन, इसके बाद यह उनकी नजरों से यह ओझल हो गया था। अब नासा के वैज्ञानिकों को यह एस्टेरॉयड दोबारा नजर आया है।इसके धरती से टकाने की आशंका 7000 में से एक के बराबर है बावजूद वैज्ञानिक इसके खतरे को कम करके नहीं देख रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इतना बड़ा एस्टेरॉयड धरती से टकरा जाए तो एक देश को खत्म कर सकता है।

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