क्या होती है आदर्श आचार संहिता इस खबर को पढ़ कर जानिए

दो राज्यों के विधानसभा चुनाव का एलान हो गया। 21 अक्तूबर को महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव है और इसी के साथ दोनो राज्यों में अचार संहिता लागू हो गया। तो इस दौरान यह जानना जरुरी है कि आप चुनाव के तमाम नियमों से अपडेट रहें। देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत पारदर्शी चुनावों के सफल आयोजन की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है। इसलिए चुनाव आयोग ‘चुनाव आचार संहिता’ लागू करता है जिसका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है।

चुनाव आचार संहिता: क्या, क्यों और कैसे

देश में होने वाले सभी चुनावों से पहले चुनाव आयोग आचार संहिता (Code of Conduct) लगाता है। इस दौरान राजनीतिक दलों, उनके उम्मीदवारों और आम जनता को सख्त नियमों का पालन करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।

सामान्य नियम:

  • कोई भी दल ऐसा काम न करे, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।
  • राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक सीमित हो, न कि व्यक्तिगत।
  • धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
  • मत पाने के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग न करें। जैसे-रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना आदि।
  • किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते या भूमि का उपयोग न करें।
  • किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा न डालें।
  • राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत होती हों।
  • राजनीतिक सभाओं से जुड़े नियम :
  • सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को दी जाए।
  • दल या अभ्यर्थी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है, वहॉं निषेधाज्ञा तो लागू नहीं है।
  • सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करें।
  • सभा के आयोजक विघ्न डालने वालों से निपटने के लिए पुलिस की सहायता करें।

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