दहेज़ ने फिर निगली, कानपूर के एक बेटी की जिंदगी

Sunil Misra New Delhi :-  प्रथाओं से कब मुक्त होगा आधुनिक भारत, खासकर दहेज़ के रूप में मिले जाने वाले धन से, जो हर घंटे, हर दिन, हर महीने, हर साल दहेज़ से होने वाली मौतों कि संख्या बढ़ ही रही हैं ज़रा सोचियेगा कि उस पिता पर जो अपने जीवन भर कि कमाई पर अपने लाड़ली पर न्योछावर करता है उस माँ के बारे में क्या कहियेगा जो कोख से लेकर अपनी बिटिया कि शादी तक हर वो संस्कार भरने कि कोशिश करती है जिससे उसका ससुराल खुश रहे लेकिन जब ससुराल से उसकी मौत कि खबर आती है तो उस माँ बाप के कलेजे पर क्या बीतती होगी ताज़ा मामला कानपुर का है।

जहां सतीश चौबे ने अपनी पुत्री की शादी संजय पाठक पुत्र देवी दयाल पाठक निवासी मकान न. १ कटरा कछुआ तालाब, पनकी कानपूर में किया था लेकिन कुछ दिन के बाद ही बेटी ने दहेज़ के लिए ससुराल द्वारा मारपीट की शिकायत पिता से की थी फिर बाद में पिता ने आने कि सांत्वना दी थी

लेकिन बाद फिर पिता के फोन करने पर फोन न उठने पर बेटी के पिता को पता चला कि पीड़ित की 06.10.19 तारीख को शाम को मृत्यु हो चुकी है पिता ने ससुराल वालो (पति संजय पाठक, ससुर देवी दयाल पाठक, सास कंचन पाठक, ननद बिटटू तिवारी)

पर अपनी बेटी को प्रताणित कर मारने का आरोप लगाया है और पनकी थाने कि पुलिस केस दर्ज़ कर कार्यवाही करने का नाम नहीं ले रही है FIR और उससे जुड़े सारे कागज़ात इस खबर के साथ लगी हुई है आप इसे गौर से पढियेगा I

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