मेरा नज़रिया

“तुग़लक़ होने कि ज़िद ना करो साहेब”

July 6, 2019

Vinayak Mumbai: बिहार कभी अपने सकारात्मक ख़बरों की वजह से सुर्ख़ियो में नहीं रहता है। क्या करें राज्य कि क़िस्मत और राज्य के जनता कि क़िस्मत दोनों ही ख़राब है। विचार करने योग्य ये सवाल है कि आखिर बिहार के क़िस्मत में है क्या? हमेशा आपदा, विपदा और ग़रीबी ने इस राज्य को पिछड़े राज्य […]

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पीड़ित महिलाओं को इन्साफ नहीं, दर दर भटकती हैं पीड़ित महिलाएं

July 4, 2019

  Sunil Misra Delhi :- अपने देश में पार्टियों की जबरदस्त भीड़ में कई नेता और उनके रिश्तेदार जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं I ज्यादातर बड़ी पार्टियों के नेता अपनी राजनीतिक शक्ति का दुरपयोग करके आम जनता के ऊपर दबाब बनाकर उनके जीवन को बर्बादी के रास्ते पर मोड़ कर […]

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फिल्म कबीर सिंह की सफलता क्या हमारे समाज पर कलंक नहीं है

June 28, 2019

Sunil Mishra: कबीर का नाम सुनते ही हमारे मन में साम्प्रदायिक सदभाव वाला कवि याद आता है। लेकिन हम परंपरा पुरुषों की स्मृतियों को तहस नहस कर रहे हैं। हम किसलिए जिंदा है। केवल हम भाग रहें हैं … बिना सोंचे-समझे…और किधर भाग रहें हैं पता नहीं, पर भाग रहें हैं। कहीं किसी की हत्या […]

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क्या कीजिएगा… बस चुनाव तक ही नेता है बाकी टाइम अमिरों के चमचा

June 22, 2019

Vikas Ranjan: ना जाने क्या होगा, भारत का भविष्य किधर जाएगा कोई नहीं जानता और फिर कोई जानेगा भी कैसे जब राष्ट्रवाद के नाम पर देश में चुनाव हो और राष्ट्र के नाम पर सब जायज ठहराया जाए। लेकिन जब राष्ट्र की नींव को ही सत्ताधारी मौत की नींद सुला दे तो क्या कहेंगे। यकीन […]

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मौत के बीच योग और कवि का दर्द

June 21, 2019

Vinayak Singh : व्यथित मौन मन उद्वेलित है। कहूँ क्या,मैं हूँ या ना हूँ। ये दिवस नहीं है योग साधना का, ये दिवस है माँओं के क्रन्दन का। छिन लिये उनके जिगर के लालों को, दिये उन्हें जीवन भर का संताप। क्या कहूँ प्रभू तुझें? कैसे कहूँ तेरी लिला अपरंपार। ये दिवस नहीं है योग […]

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