आखिर डिकोड हुई भारतीयों की जन सामुदायिक इतिहास

जैव चिकित्सीव अनुप्रयोगों हेतु 1008 भारतीयों की जीनोम सीक्वेंसिंग

Sunil Misra New Delhi :-    जैव चिकित्सीय विज्ञान हेतु महत्वपूर्ण प्रेरक बल, सम्पूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग के माध्यम से आनुवंशिक ब्लूप्रिंट को विकोडित करने की क्षमता के साथ सीआईएसआर ने प्रागुक्तिपरक और निवारक चिकित्सा में समर्थ बनने के लिए अपने प्रयासों का खुलासा किया I सीआईएसआर द्वारा विभिन्न जन समुदायों के १००८ भारतीयों की सम्पूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग की घोषणा की गयी थी  सीआईएसआर द्वारा अप्रैल २०१९ में यह इंडिजेन (indiGen ) पहल प्रारम्भ की गयी थी, जिसे सीआईएसआर -जीनोमिकी और समवेत जीव विज्ञान संस्थान (आईजीआईबी ), दिल्ली और सीआईएसआर-कोशकीय और आण्विक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी), हैदराबाद द्वारा क्रियान्वित किया गया था I इस इंडीजेन कार्यक्रम के तहत समग्र देश से लिए गए भयारतीयों की सम्पूर्ण जीनोम सीक्वेंसिंग पूरी कर ली गयी है I यह निर्धारित समय -सीमा में पापुलेशन स्केल पर जीनोम सरकेंसिंग और कम्प्यूटेशन विश्लेषण की मापक्रमणीयता की बेंचमार्किंग करने में समर्थ है I
इंडीजेन के परिणामों का उपयोग पापुलेशन स्केल पर आनुवंशिक विविधता को समझने और चिकित्सीय अनुप्रयोगों हेतु आनुवंशिक की भिन्न आवृतियां उपलब्ध कराने तथा रोगों की आनुवंशिक महामारी विज्ञान में समर्थ बनने के लिए किया जाएगा I व्यापक पैमाने पर जीनोमिक डाटा के विश्लेषण हेतु सम्पूर्ण जेनोम डाटा और तकनीकी जानकारी प्रमाण जुटाने और भारत में चिकित्सीय और जैव चिकित्सीय अनुयप्रयोगो हेतु प्रौद्योगिकी के विकास में सहायता प्राप्त होने की प्रत्याशा है I
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन ने कहा सम्पूर्ण जीनोम प्रीसीशन मेडिसिन के उभरते क्षेत्रों में तकनीकी जानकारी, मूल डाटा और घरेलू क्षमता का निर्माण और इंडीजेन के परिणामों के दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के तीव्र और कुशल निदान सहित अनेक क्षेत्रों में अनुप्रयोग करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे. उन्होंने कहा की रोगों की महामारी विज्ञान से सस्ते आनुवंशिक परीक्षण, आशान्वित जोड़ों  के लिए फकरीर स्क्रीनिंग अनुप्रयोग, वंशागत कैंसर के कुशल निदान तथा दवा के प्रतिकूल रिएक्शन से बचने के लिए फार्माकोजेनेटिक परीक्षण आदि कुछ अन्य लाभ है I  डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा इंडीजेनोम कार्ड और इंडीजेन मोबाइल अपप्लिकेशन पर प्रकाश डालते हुए कहा की इससे प्रतिभागी और चिकितसक अपने जीनोमों में चिकत्सीय दृष्टि से व्यवहारिक जानकारी को प्राप्त कर सकते है I
और यह डाटा गोपनीयता और डाटा सुरक्षा को सुनिश्चित करता है. भारत भर में इसका परीक्षण करके वाणिज्यिक संगठन इसमें रूचि दिखा रहे है I
महानिदेशक, सीएसआईआर ने उल्लेख करते हुए कहा, कि भारत अपने अद्वितीय मानव विविधता के कारण पयाप्त रूप से प्रतिनिधित्व करने और जेनोम देता बनाने, विश्लेषण करने, उपयोग और संचार करने के लिए स्वदेशी क्षमता विकसित करता है I
सीएसआईआर मानव जीनोमिक विज्ञान का नेतृत्व करके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीनोमिक्स में  “भारतीय जेनोम भिन्नता” को प्रमुख योगदान दिया है सीआईएसआर ने डीएनए /जीनोम आधारित चिकित्सीय और बड़ी संख्या में नैदानिक सहयोगियों के साथ विचार विमर्श से भारत में आनुवंशिक रोगो के चिकित्सीय विन्यास में जीनोमिक्स के अनुरायोग की भी अगुवाई की है I

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