वाहन चेकिंग में चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया बदमाश, 4.10 लाख की 6 गाडिय़ां जब्त 

रीवा-सतना में कर रहा था वारदात, एक की तलाश जारी 
डिजिटल डेस्क सतना। जिले की कमान संभालते ही पुलिस कप्तान धर्मवीर सिंह ने व्हीकल डिटेक्शन पोर्टल के इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया था, जिसका सकारात्मक परिणाम मैहर में सामने आया है जहां वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस ने वीडीपी के इस्तेमाल से अंतर जिला चोर गिरोह का पर्दाफाश कर 6 मोटरसाइकिल बरामद कर ली, साथ ही एक आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया। एसडीओपी हिमाली सोनी ने बताया कि शनिवार देर रात को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर ढाबे के पास वाहनों की जांच की जा रही थी, तभी बाइक क्रमांक एमपी 19 एमयू 4155 से एक युवक तेजी से आया जिसे रोककर पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम अमित पांडेय पुत्र रावेंद्र पांडेय 26 वर्ष निवासी जेपी रोड चोरहटा जिला रीवा बताया, मगर जब वीडीपी पर वाहन  का रजिस्ट्रेशन नंबर डाल कर चेक किया गया तो बाइक भगत सिंह पुत्र कोदू सिंह 32 वर्ष निवासी उदयपुर थाना मैहर के नाम पर दर्ज पाई गई। लिहाजा युवक से सख्त लहजे में पूछताछ की गई तो उसमें ज्ञानेंद्र पटेल उर्फ लाला निवासी घोघर जिला रीवा के साथ मिलकर अलग-अलग जगह से 6 बाइक चोरी करने का खुलासा कर दिया। आरोपी की निशानदेही पर काले रंग की पल्सर, स्लेटी रंग की अपाची, काले रंग की स्प्लेंडर, बजाज डिस्कवर और सिटी 100 बरामद कर ली गई जिनकी कुल कीमत 4 लाख 10 हजार रूपए थी। आरोपी को रविवार दोपहर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में टीआई देवेंद्र सिंह चौहान, एसआई हेमंत शर्मा, प्रधान आरक्षक संतोष शुक्ला, आरक्षक अनिल सिंह, पंकज मिश्रा, जितेन्द्र द्विवेदी, अनिल द्विवेदी और राघवेंद्र सिंह ने अहम भूमिका निभाई।8 घंटे पहले पार किया था बाइक
आरोपी अमित पांडेय को जिस बाइक के साथ पुलिस ने पकड़ा उक्त गाड़ी   शनिवार शाम करीब 4 बजे मैहर में सरगम होटल के बाहर से चोरी कर रीवा ले जा रहा था। गाड़ी मालिक भगत सिंह के द्वारा देर शाम को ही दर्ज कराई गई थी। पुलिस का मानना है कि फरार आरोपी ज्ञानेंद्र की गिरफ्त में आने पर वाहन चोरी के और भी मामलों का खुलासा हो सकेगा। नहीं बचेंगे चोर, मैदानी अमले को दी जा रही ट्रेनिंग
वीडीपी के इस्तेमाल पर जोर देते हुए एसपी धर्मवीर सिंह ने कहा कि इसका जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतना ही वाहनों की चोरी पर रोक लगेगी। यह पोर्टल सीसीटीएनएस से लिंक है। ऐसे में प्रदेश के किसी भी थाने में गाड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज होते ही सारी जानकारी पोर्टल पर अपडेट हो जाती है और जब चेकिंग के दौरान पुलिस स्टाफ वाहन का रजिस्ट्रेशन, चेसिस, इंजन अथवा मॉडल नंबर के 5 लगातार अंक डालकर सर्च करता है तो विवरण सामने आ जाता है। ऐसे में चोरी की गई गाड़ी अथवा लावारिश मिले वाहन के मालिक का पता लगाना आसान हो जाता है तो चोरों में भी पकड़े जाने का डर रहता है। एसपी ने बताया कि जिले में मैदानी अमले को पोर्टल के उपयोग की ट्रेनिंग दी जा रही है तो हर दिन चेकिंग में कुछ वाहनों का स्टेटस इसके जरिए देखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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