यू पी में कैदियों की रिमांड “वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग” के जरिये

शातिर अपराधियों  पर लगेगी लगाम

Sunil Misra New Delhi :-  उत्तर प्रदेश में क़ानून का डंडा कठोर करते हुए मुख्य मंत्री ने नए आदेश जारी किये है कि पुलिस की क़ानून व्यवस्था और कारागार में उड़ाई जा रही क़ानून की धज्जियां अब बर्दाश्त से बाहर है और इन सभी व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन को चुस्त करना बहुत जरूरी है
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कैदियों की अदालत में पेशी की कार्यवाही को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कराने के निर्देश देते हुए कहा है कि इसके लिये जरूरत पड़ने पर कानून में बदलाव भी किया जाए।योगी ने मंगलवार रात कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कैदियों की शत-प्रतिशत रिमांड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जाए। इसके लिए अगर कानून में संशोधन कराना जरूरी हो, तो किया जाए। उन्होंने कहा, ‘‘उस संशोधन को कराकर कैदियों की पेशी की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कराई जाए। इससे कैदियों को बाहर ले जाने की जरूरत नहीं होगी और वे बाहरी व्यक्तियों के सम्पर्क में नहीं आ सकेंगे।
मुख्यमंत्री का यह आदेश पिछले महीने सम्भल में कैदियों को पेशी पर ले जाते वक्त दो पुलिसकर्मियों की हत्या करके तीन कैदियों को छुड़ा ले जाने तथा पूर्व में पेशी के लिए लाये गये कैदियों के फरार होने जाने की घटनाओं के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा सकता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में सीसीटीवी कैमरा तथा अन्य आवश्यक उपकरण जल्द लगाये जाए और जेलों से संचालित की जा रही अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगायी जाए। शातिर अपराधियों के साथ किसी भी प्रकार की रियायत न बरती जाए। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न कारागारों की व्यवस्था और कार्य प्रणाली के संबंध में नियमित निरीक्षण किये जाने के निर्देश भी दिए।

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