गृह मंत्री की नज़रों में कैसे हुए समाज सुधारक प्रधानमंत्री

ट्रिपल तलाक की प्रताड़ना 50 फीसदी मुस्लिम आबादी ने झेला

Sunil Misra New Delhi :-  दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि तीन तलाक एक कुप्रथा थी इस के विरोध के पीछे तुष्टीकरण की राजनीति है. यह मुस्लिम महिलाओं की भलाई के लिए लाया गया है. यह ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए पीएम मोदी का नाम इतिहास के समाज सुधारकों में लिखा जाएगा.
उन्होंने कहा कि 16 घोषि‍त इस्लामी देशों ने अलग-अलग समय पर ट्रिपल तलाक को तलाक देने का काम किया है, ये कानून बनने से मुस्लिम महिलाओं को हक मिला है. इसमें कोई संदेह नहीं है. तीन तलाक पर हमें 56 साल लगे. उन्होंने कहा कि यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का कमाल है कि मोदी सरकार ने साढ़े पांच साल के अंदर 25 से ज्यादा ऐतिहासिक निर्णय लेकर देश की दिशा बदलने का काम किया है. ट्रिपल तलाक की प्रताड़ना 50 फीसदी मुस्लिम आबादी यानी माताओं, बहनों को झेलनी पड़ती है. आज हमारे लिए बिल लेकर न आना दुनिया के सामनेएक बड़ा धब्बा होता. इसके लिए मुस्लिम महिलाओं ने काफी लड़ाई लड़ी. शाहबानो को ट्रिपल तलाक दिया गया तो वे अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक गईं.’ गृह मंत्री ने कहा, कि 60 के दशक के बाद कांग्रेस की राजनीति का असर देश के लोकतंत्र, समाजिक जीवन और गरीबों के उत्थान पर पड़ा है.
उन्होंने कहा कि बिना तुष्टीकरण यह सरकार समविकास, सर्वस्पर्शी विकास, सर्वसमावेशी विकास के आधार पर पांच साल चली. इसी थ्योरी पर 2019 में ठप्पा लगाकर इस देश की जनता ने तुष्टीकरण से देश को हमेशा के लिए मुक्त करने के लिए दोबारा बहुमत दिया है. उन्होंने कहा, ‘मूल आघात करने की जरूरत तुष्टीकरण की राजनीति पर है.
एक एनजीओ के सर्वे में कहा गया था कि 92 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक़ से मुक्ति चाहती हैं. लोग कहते हैं कि कानून बना देने से क्या तीन तलाक़ रुक जाएगा? मैं कहता हूं क्या चोरी रोकने का क़ानून बना देने से ही चोरी बंद हो जाती है? यह क़ानून शिक्षणात्मक बनाया गया है, ताकि लोगों में भय पैदा हो.
जिनके मन में न मेहनत का भाव है और न ही संवेदना है, वे लोग तुष्टीकरण जैसे शॉर्टकट को अपनाते हैं और वोटबैंक की राजनीति करते हैं. तीन तलाक बिल राज्यसभा में पारित होने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि उनका यह कदम भारत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा. मंत्री ने कहा, ‘जो राजनीति 60 के दशक के बाद कांग्रेस ने शुरू की और बाकी दलों ने भी उसका अनुसरण किया, उसका असर देश के लोकतंत्र, समाजिक जीवन और गरीबों के उत्थान पर पड़ा है. जो अभाव में जी रहा है, जो गरीब-पिछड़ा है, वो किसी भी धर्म का हो. विकास के दौर में जो पिछड़ गया है, उसे ऊपर उठाओ, अपने आप समाज सर्वस्पर्शी-सर्वसमावेशी मार्ग पर आगे बढ़ जाएगा.’
उन्होंने कहा कि बिना तुष्टीकरण यह सरकार समविकास, सर्वस्पर्शी विकास, सर्वसमावेशी विकास के आधार पर पांच साल चली. इसी थ्योरी पर 2019 में ठप्पा लगाकर इस देश की जनता ने तुष्टीकरण से देश को हमेशा के लिए मुक्त करने के लिए दोबारा बहुमत दिया है. उन्होंने कहा, ‘मूल आघात करने की जरूरत तुष्टीकरण की राजनीति पर है. 2014 में इस देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत देकर तुष्टीकरण की राजनीति के अंत की शुरुआत कर दी.’
उन्होंने कहा, ‘मूल आघात करने की जरूरत तुष्टीकरण की राजनीति पर है. 2014 में इस देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को पूर्ण बहुमत देकर तुष्टीकरण की राजनीति के अंत की शुरुआत कर दी. जिनके मन में न मेहनत का भाव है और न ही संवेदना है, वे लोग तुष्टीकरण जैसे शॉर्टकट को अपनाते हैं और वोटबैंक की राजनीति करते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘यह पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक दिन है. आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिमिला है. सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है. इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं.

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