पीड़ित महिलाओं को इन्साफ नहीं, दर दर भटकती हैं पीड़ित महिलाएं

 

Sunil Misra Delhi :- अपने देश में पार्टियों की जबरदस्त भीड़ में कई नेता और उनके रिश्तेदार जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं I ज्यादातर बड़ी पार्टियों के नेता अपनी राजनीतिक शक्ति का दुरपयोग करके आम जनता के ऊपर दबाब बनाकर उनके जीवन को बर्बादी के रास्ते पर मोड़ कर मानवता से खिलवाड़ करके तबाह कर देते है I राजनीतिक स्तर पर महिलांओं की भीड़ का चलन शुरू हो चुका है I आज समाज में देखा भी गया है की किसी साधारण समाज में जीने वाली महिलाओं का दर्द कोई राजनीतिक महिला भी स्वयं नहीं समझती और न वो महिला समझना ही चाहती है क्योकि जिस राजनीतिक स्तर पर वो अपने दम पर पहुँची है वहां से उसे भविष्य में बहुत कुछ मिलने का ख्वाब होता है उस साधारण महिला की सहायता करके वो अपने आप को राजनीतिक नेताओं के नज़रों में नहीं गिराना चाहती I क्युकी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का उसमे कहीं न कहीं शामिल होने की संभावना होती है I हमारे समाज में हर मिडिल क्लास की महिलाओं को कहीं न कहीं नेताओं द्वारा प्रताड़ित किया गया है लेकिन ये साधारण समाज की महिलाओं की दुर्दशा का दुःख सुनने वाला कोई नहीं है ऐसे कई मामले हमारे दिल्ली महिला आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और पुलिस तथा अन्य संस्थाओं में विचार के लिए लंबित पड़े है कोई कार्रवाई नहीं होती है और पीड़ित को एक ऑफिस से दुसरे ऑफिस में दौड़ा दौड़ा कर बहुत ज्यादा परेशान कर दिया जाता है लेकिन उक्त सभी संस्थाओं की अध्यक्ष पद पर महिला होते हुए भी देश की महिलाओं को अपनी जिंदगी को कोस-कोस कर रोना पड़ता है
कहने का तात्पर्य ये है कि देश में असुरक्षित महिला केवल अपनी सुरक्षा की बाते advertisement में, पेपर में, घोषणा पत्र में और जगह जगह पोस्टरों में देख, और सुन सकती है लेकिन ऑफिस में जाकर केवल पत्र दे सकती है फिर इंतज़ार करते रहो न जवाब आएगा, न आपको पता ही चलेगा कि क्या हो रहा है कार्य नगण्य ही होगा I

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