दिल्ली मे न्यू अशोक नगर कालोनी से 2 नही 40 बच्चे गायब 


न्यू अशोक नगर थाना को अपने इस करतूत पर भी तनख्वाह लेते शर्म नहीं आती

Delhi Bureau :-  पूर्वी दिल्ली क्षेत्र मे थाना न्यू अशोक नगर के अंतर्गत आने वाली न्यू अशोक नगर कालोनी को बेसहारा कहा जाए तो अति उत्तम होगा क्युकि किसी की बीबी खो जाए, किसी का बच्चा खो जाए थाना गून्गा बहरा बन जाता है जनता रोती बिलखती रहे इन वर्दी वालो को केवल पैसे वाली मुर्गी चाहिये कोई सुनवाई नही करते ! विशाल जी से बात करते हुए SHO कहते है कि “4 नहीं 40 बच्चे खोये है” तो थाना हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है बड़ा गंभीर मामला है इस थाने का I

ऐसा ही एक मामला दो परिवारो का आया है एक का बच्चा अभिनन्दन कुमार पुत्र श्री रंजय सिंह निवासी ई डी -25 -26 न्यू अशोक नगर दिल्ली -96 से 7 अगस्त को खोया उस पर कोई कार्यवाही नही ! दूसरा लक्ष पुत्र श्री विनोद कुमार निवासी ई – 83 न्यू अशोक नगर दिल्ली -96 से 22 अगस्त को खोया उस पर भी कोई कार्य वाही नही ! आखिर क्यो? दिल्ली पुलिस के थाना इन्चार्ज तेज राम मीणा, आई ओ परीक्षित पवार, चुप्पी साधे हुए है और पीड़ित कई बार खुद थाने जाता है उसे टाल मटोल कर वापस कर दिया जाता है और कोई भी पुलिस जांच से सम्बंधित कर्मी इन्हे इनकी FIR का जवाब नहीं देते i
इसी सिलसिले मे पीडितो ने रविवार शाम 3 बजे ACP सुबोध गोस्वामी की मीटिन्ग बुलाई थी ACP सुबोध गोस्वामी को आना था लेकिन उन्होने भी आने से मना कर दिया उन्हें ये समाज के रोते बिलखते परिवारों के दुःख दर्द को सुनने का समय नहीं है I SHO को खोये बच्चो के जांच से मतलब नहीं है आई ओ जांच नहीं करता I आखिर इन्हे तनख्वाह क्यों दी जाती है ऐसे लापरवाह पुलिस कर्मियों पर कार्यवाई क्यों नहीं होती I
एक डेढ़ महीने से पीडित परिवार थाने के चक्कर लगा रहा है लेकिन थाने से कोई भी आई ओ या पुलिस वाला उनके घर पर बच्चे का खोने की पूछ ताछ, या जांच जैसी कोई जानकारी लेने नही आया
इन गरीबों के साथ न कोई पुलिस कर्मचारी, न कोई सान्सद, न विधायक, न पार्षद जैसा कलाकार खड़ा है, खड़ा है तो बस केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता “विशाल कुमार” I
सवाल उठता है कि दिल्ली पुलिस को “शान्ति-सेवा-न्याय” का पाठ गले से नीचे क्यु नही उतरता ! आखिर ये नारा देने वाले बड़े अधिकारी ऐसे लोगो को ये पाठ कब सिखाएंगे I
दिल्ली पुलिस के कर्मचारी आम सभा मे जाते है तो जनता के चम्चे बन जाते है और जब वर्दी पहन लेते है तो राक्षस बन जाते है अब किस रूप मे इन बच्चो को पुलिस ढून्ढेगी इनका कौन सा अधिकारी ईमान्दारी से काम करेगा ये वक्त बताएगा

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