“तुग़लक़ होने कि ज़िद ना करो साहेब”

Vinayak Mumbai: बिहार कभी अपने सकारात्मक ख़बरों की वजह से सुर्ख़ियो में नहीं रहता है। क्या करें राज्य कि क़िस्मत और राज्य के जनता कि क़िस्मत दोनों ही ख़राब है। विचार करने योग्य ये सवाल है कि

आखिर बिहार के क़िस्मत में है क्या?

हमेशा आपदा, विपदा और ग़रीबी ने इस राज्य को पिछड़े राज्य कि श्रेणी में खड़ा कर दिया है। बिहारी कहलाना दूसरे राज्यों में एक गाली के समान है, लेकिन क्या करे बेचारा बिहारी घर और पेट चलाने के ख़ातिर तो कहीं ना कहीं जाना तो पड़ेगा ही। राज्य के इस हालात के लिए जितना हम ज़िम्मेदार हैं उतना ही हमारी सरकारें ज़िम्मेदार हैं।

अभी बिहार में 15 सालों से सुशासन बाबू कि सरकार है। राज्य कि स्थिति कुछ ज़्यादा सुधरी नहीं है क्योंकि अभी बिहार में चमकी बुखार से लगभग 200 बच्चों ने दम तोड़ दिया लेकिन सरकार है कि कोई ठोस पहल करने के लिए अभी तक कमर नहीं कसी है।

लेकिन सुशासन बाबू के नये तुग़लक़ों फ़रमान ने सबको चौका दिया है कि नये बिहार म्यूज़ियम से पूराने म्यूज़ियम तक अंडरग्राउड़ रास्ता बनाया जायेगा। ये वही तुग़लक़ी फ़रमान है जिसमें मुहम्मद तुग़लक़ ने दिल्ली से दौलताबाद राजधानी करने का फ़रमान सुनाया था। तो दौर कुछ और था और सुशासन बाबू ये दौर कुछ और है। आप ने तो अक्षरश: ये साबित कर दिया कि “ रोम जल रहा था और नीरो वंशी बजा रहा था”

आपके राज्य में आधारभूत संरचना कि घोर कमी है फिर भी आप बिहार को सिंगापुर बनाने कि सोच रहे हैं साहेब। ये तो बिहार और बिहार कि जनता के साथ बहुत नाइंसाफ़ी होगी। बिहार के गरीब जनता के पैसे को इस प्रकार ना उड़ाइये

गौर करने वाली बात यह है कि अस्पतालों में डाक्टर कि कमी है लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। इलाज के अभाव में लोगों ने दम तोड़ा है लेकिन आप है कि बिहार को सिंगापुर बनायेंगे। ग़रीबी का आलम यह है कि लोगों को दो जून कि रोटी नहीं मिल पाती राज्य में और राज्य कि आधी अबादी रोज़गार के खोज में राज्य से बाहर हो गई है लेकिन इसकी चिंता आपको नहीं है लेकिन बिहार को आप सिंगापुर बनायेंगे ज़रूर।साल दर साल बितता गया कि बिहार को आप एक पायदान तो उपर लाने कि कोशिश करेंगे लेकिन वो भी ना हो पाया आपसे। आपके सुशासन का बिहार में 15 साल होने जा रहा है लेकिन आपने बिहार में एक भी कल कारख़ाने लगाने कि कोशिश नहीं कि जिससे बिहार में रोज़गार मिले लोगों को लेकिन फिर भी आप बिहार को सिंगापुर बनायेंगे ये कैसी ज़िद्द है साहेब आपकी? जिस राज्य के लोग ग़रीबी रेखा से नीचे अपना जीवन जीने को मजबूर हैं उस राज्य को आप किन शर्तों पर सिंगापुर बनाने कि सोच रखते हैं ये तो समझ से परे है।कहा जाता है राजनेता कि समझ उसके राज्य और देश को गति देने वाला होता है लेकिन ये आपकी कैसी समझ है इसको बता पाना शायद आपके भी बस के बाहर है। प्रदेश को बेहतर बनाने के लिए साहेब प्रयत्न किजिये आप क्योंकि अगर प्रदेश बेहतर होगा तो ही आप सिंगापुर बना सकते है वरना ऐसा करना बहुत कठिन हो जायेगा आपके लिए। राज्य कि जनता ने आपके खिलाफ अगर मोर्चा खोल दिया तो ये आपका सपना सपना ही रह जायेगा। बिहार के उत्थान के लिए कार्य करिये तो बेहतर होगा।

कहीं ऐसा न हो की आपकी थोड़ी सी जो छवि बची है वो भी बर्बाद हो जाये। समय अभी है अपने फ़ैसले पर विचार ज़रूर कीजियेगा।

 

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