डाक्टर और मरीज़ों के बीच प्यार का रिश्ता जरूरी

मरीज़ के लिए डाक्टरों की आखों में प्यार, जुबान में मिठास, मीठी मुस्कान होना चाहिए

Sunil Misra :-  डॉक्टर्स डे पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सभी पदाधिकारियों के विचार विमर्श में डॉक्टर्स और मरीज़ों के व्यवहार में कैसे बदलाव लाया जाए इस पर चर्चा हुई भारत में डाक्टर का पेशा धीरे धीरे मरीजों के साथ बहुत कठिन होता जा रहा है आज के व्यस्त जीवन व्यवस्था में हर अस्पताल के किसी भी विभाग के यूनिट में मरीजों के भीड़ का ताता लगा रहता है उस भीड़ के आधे से ज्यादा लोग अपने मरीज की व्यथा को देख कर परेशान रहते है और आधे लोग अस्पताल की त्रुटिपूर्ण व्यवस्था को देख कर दिमाग पर दबाब बना लेते है और उसी बीच जब भीड़ के किसी मरीज की हालत मुश्किल में होती है तो वह व्यक्ति जल्दी डाक्टर को दिखाने की कोशिश करता है लेकिन डाक्टर भी अपने मरीज़ को अधूरे इलाज़ में नहीं छोड़ सकता ऐसे में मरीज़ आपे से बाहर होकर झगडे पर उतर जाता है तो इस तरह डाक्टर को भी चाहिए कि किसी के सहायता से उसे भी अटेंड कर ले या उसी जगह मरीज़ को भी चाहिए कि धैर्य रखते हुए वो डाक्टर से प्यार से बातचीत कर के अपना मरीज़ की देखभाल करा ले I इससे
हमें दोनों ही रिश्तों को देखते हुए देश के अंदर सभी अस्पतालों में डाक्टर और मरीजों के अटेंडेंट के बीच एक प्यार और मीठी मुस्कान का रिश्ता बनाना चाहिए वैसे डाक्टर की ये ज्यादा जिम्मेदारी बनती है कि वो किसी भी प्रकार का मरीज़ आता है उसे अपनी मीठी मीठी मुश्कान और प्यार भरे बोल तथा अपने आखों से प्रभावित करने की आदत डालना चाहिए ताकि कोई परेशान मरीज़ का आधा दर्द उसी से कम हो जाता है
और फिर ऐसी कोई बात होगी हे नहीं जिससे लड़ाई की कोई नौबत आये I
मै समझता हूँ कि केवल डाक्टर ही नहीं व्यवहार में बदलाव अस्पताल के डाक्टर के साथ साथ स्टाफ में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को भी लाना चाहिए क्योकि हर दर्द को अपना दर्द समझकर मरीज़ भी एक दूसरे की मदद करता है इसी तरह डाक्टर को भी चाहिए कि मरीज़ को उसकी तरह से थोड़ा बहुत मिल कर उसे मना लेना चाहिए ी
काफी समय पहले की बात है कि डाक्टर को मरीज़ भगवान् का रूप मानता था लेकिन वह दर्ज़ा भी आज ख़त्म नहीं होना चाहिए ताकि ये सच है कि एक अंतिम सांस लेने वाला व्यक्ति भी डाक्टर के नाम पर विश्वास करके उसके पास आता है और डाक्टर अपनी पूरी ताकत से उसके विश्वास को बरकरार रखता है तभी मरीज़ उसके पास एक की संख्या से बढ़कर सौ की संख्या में पहुँचते है I
इसलिए मेरा मानना है कि डाक्टर और मरीज़ के व्यवहार को प्रेम पूर्वक रखने के लिए हमें अस्पताल के नियमो को मानते हुए जगह जगह बोर्ड पर स्लोगन आदि लिखकर बदलाव लाया जा सकता है कृपया डाक्टर आपका दोस्त है, डाक्टरों से मीठे बोल, मुस्करा कर, बात करें, भगवान् को हमेशा याद रखे,दर्द को भूल कर मुस्कराते रहे I आपस में प्रेम से व्यवहार करे I ये बातें किसी ऊंचाई तक डाक्टर और मरीज़ों के बीच उठे बुराइयों को अच्छाइयों में बदल सकती है

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