जनाब….नाम में बहुत कुछ है !

छुटपन से अब तक जब आप बड़े हो चुके हैं…. देश दुनियां घुम चुके हैं। मुमकिन है कि आप अभी और घुमने की इच्छा रखते हों। हो सकता है देश का कोना-कोना छानना ही आपका शौक हो लेकिन फिर भी क्या आपको पता है उन शहरों के नाम के अंतिम हिस्से का मतलब?
अंतिम हिस्सा यानी जैसे- कानपुर में पुर, फिरोजाबाद में आबाद और अलीगढ़ में गढ़।
तो आइए जानते है क्या है ‘पुर’ का महत्व?

रायपुर, सहारनपुर, कानपुर, गोरखपुर, नागपुर जैसे तमाम अन्य भारतीय शहरों गांवों के नाम पुर के साथ जुड़ा हुआ है। दरअसल, ‘पुर’ शब्द वेदों से आया है। ऋगवेद में पुर या पुरा का कई बार जिक्र किया गया है जिसका मतलब शहर या किला होता है। ये संस्कृत में शहर के लिए सबसे पुराना शब्द है। आजकल पुर शब्द जहां शहरों के साथ जुड़ा है वहीं पुरा को मोहल्ले के नामों से जोड़ दिया जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुनील कुमार के मुताबिक, ‘भारतीय शहरों के नाम समय-समय पर बदलते रहे हैं और पुर शब्द का प्रभाव अरबी भाषा में भी नजर आया।’ यानी सिर्फ वेदों में नहीं बल्कि अरबी भाषा में भी इस शब्द का महत्व मौजूद है। आज भारतीय उपमहाद्वीप के अलावा दक्षिणपूर्वी एशिया, अफगानिस्तान और इरान में भी इस शब्द से जुड़े नाम देखने व सुनने को मिल जाएंगे।
– कैसे जुड़ा ‘आबाद’?
पुर के अलावा जो शब्द भारत व कई अन्य एशियाई शहरों के नामों में देखा गया वो है ‘आबाद’। हैदराबाद, अहमदाबाद, फैजाबाद जैसे भारत के तमाम शहर हों या पाकिस्तान में इस्लामाबाद और बांग्लादेश में जलालाबाद जैसे शहर। आखिर ‘आबाद’ शब्द कैसे और क्यों इन नामों के साथ जुड़ा। दरअसल, ये एक फारसी शब्द है। फारसी में ‘आब’ का मतलब पानी होता है। इस पूरे शब्द का अर्थ है कोई भी गांव, शहर या प्रांत जहां पर फसल हो सके या वो जगह रहने योग्य हो। जीएस पीजी कॉलेज सुल्तानपुर के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर मोहम्मद शमी ने बताया कि, ‘मुगलकाल के दौरान जब किसी शहर या जगह का नाम रखना होता था तो वहां से संबंधित हस्ती (आमतौर पर राजा) के नाम के साथ आबाद जोड़ दिया जाता था। इससे न सिर्फ वहां पर मुगल सल्तनत की छाप छोड़ी जाती थी बल्कि शहर के लोगों को पहचान भी देने का भी प्रयास होता था।’ जैसे फिरोजाबाद का नाम फिरोज शाह के नाम से जोड़ा गया।
– गढ़ का मतलब..
गढ़ शब्द से ज्यादातर लोग वाकिफ हैं कि ये किले से संबंधित है। चाहे भारतीय इतिहास में राजपूत हों या मुगल शासक, उन्होंने कई राज्यों में अपने किले स्थापित किए। इसके जरिए वो न सिर्फ अपने रहने की जगह स्थापित करते थे बल्कि ताकत को दिखाने का भी ये एक जरिया माना जाता था। इसी तर्ज पर शहरों को भी सालों साल बदलते रूप के साथ नए-नए नाम मिले और गढ़ भी आबाद शब्द की तरह तमाम लोगों के नाम या उनके धर्म, समुदाय के साथ जुड़ता चला गया। जैसे अलीगढ़। इस शहर का नाम सालों तक ‘कोल’ था। राजपूत आए, फिर मुगल राजा पहुंचे इसके बाद जाट राजा सूरजमल ने यहां के किले पर कब्जा जमाया और इसका नाम रामगढ़ रखा लेकिन फिर नजफ खान ने इस अहम किले पर कब्जा करके यहां का नाम अलीगढ़ रख दिया।
– और भी कई प्रकार के हैं नाम और उनके अर्थ
नगर- ये किसी शहर के लिए संस्कृत शब्द है, जैसे- श्रीनगर, गांधीनगर, रामनगर
कोट/कोड- इसका अर्थ किला है, जैसे- राजकोट, पठानकोट, कोजीकोड
पत/प्रस्थ- इसका अर्थ जमीन है, जैसे- सोनीपत, पानीपत, इंद्रप्रस्थ
नाथ- हिंदू भगवान या धाम, जैसे- अमरनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ
एश्वर/इश्वर/एश्वरम- संस्कृत में भगवान, जैसे- रामेश्वरम, भुवनेश्वर, बागेश्वर
मेर- पहाड़ या ऊंचा स्थान, जैसे- अजमेर, बाड़मेर, जैसलमेर

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