उत्तर प्रदेश के हापुड़ में ग्रामीण इलाकों की हालत खस्ता

Anil Kumar Hapur  :-  उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गॉवों में सरकारी कर्मचारियों के सुचारित रूप से ड्यूटी न करने से वहां के लोगो में रोष व्याप्त है वहां के लोगो का कहना है कि गांव में सफाई कर्मचारी पहले तो आते नहीं है और यदि आते है तो नशे की लत में टुल्ल रहते है और लोगो से बुरी आदतों के साथ पेश आते है इनकी बदतमीजी से ग्रामीण परेशान हो चुके हैं। लोकल गाओवासियों का कहना है कि सभी सफाई कर्मचारी का मेडिकल होना चाहिये I कई और वजह से भी समाज में महिलाएं भी परेशान है जिसकी वजह से स्कूल की छात्राओं ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया है I
और यादनगर के ग्रामीण लोग दूषित पानी पीने को मजबूर है तालाब में अतिक्रमण हो रहा है और जलनिकासी प्रभावित हो रही है I और विधवा पेंशन,सरकारी नल,कच्चे रास्ते,बिजली,आदि समस्याओं से बुजुर्ग व विधवा महिलाएं परेशान हैं कहने के बावजूद 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा फेल हो चुका है यादनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल बेहाल है सरकार के सारे दावे फेल हो चुके है यूपी का यादनगर गांव विकास से कोसों दूर है वीडियों में देखें इसकी हालत एक ओर सरकार सुदूर ग्रामीण इलाकों तक विकास की रोशनी पहुंचा देने को लेकर बड़े बड़े दावे करती है। वहीं, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। हम बात कर रहे हैं हापुड़ जिले के ग्राम यादनगर की। मुख्यालय से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 2 हजार है। गांव के बाशिंदे खेती या मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं।गांव में सड़क, बिजली,पानी, स्वास्थ्य सेवा जैसे मूल भूत सुविधाओं का घोर अभाव है। गांव में 70 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं लेकिन शिक्षा को लेकर गांव के लोगों में जागरूकता की कमी दिखाई दे रही है। एक ओर जहां सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर सड़क निर्माण कराए जा रहे हैं। वहीं यादनगर गांव के लोगों को अबतक टूटी हुई कच्ची रास्ते नसीब में है। अलबत्ता यह गांव विकास से कोसो दूर है।गांव को देखते हुए बहुत हुआ लेकिन गांव वालों का कहना है कि पक्षपात को साथ लेकर विकास कराया गया है।
गांव की मुख्य समस्याएं है पूरी ग्राम सभा मे पक्की नालियां नहीं है।गांव के सरकारी उप स्वास्थ्य केंद्र की बाउंड्री गायब कर दी है चारो तरफ घास खड़ी है। समय से ग्रामीणों का टीकाकरण नहीं हो पाता है। मरीजों को शहर के अस्पताल ले जाने के लिए 108 या फिर खुद के वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ता है।गांव में 72 घण्टे बिजली टांसफार्मर की जगह 2 महीने हो गए है। गांव में शतप्रतिशत घरों में शौचालय बने हुए है लेकिन उनका इस्तेमाल बहुत कम लोग करते है ज्यादातर लोग खुले में शौच जाते हैं।शमशान घाट का कोई निर्माण नही है।तालाबो पर अवैध कब्जे हुए पड़े है।सरकारी स्कूल में चारो तरफ घास ही घास देखी जा सकती है

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