आँखों की देखभाल के लिए हुई अत्याधुनिक एवं विदेशी चिकित्सा प्रोटोकॉल पर विचार

 

Sunil Misra New Delhi :-  इंट्राऑक्यूलर इंप्लांट एंड रिफ्रैक्टिव सोसाइटी (आईआईआरएसआई) ने आँखों की देखभाल के अत्याधुनिक तरीकों देखभाल प्रदान करने के 2 दिवसीय वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल, श्री अनिल बैजल ने किया। पद्मश्री से सम्मानित और आईआईआरएसआई के वैज्ञानिक समिति अध्यक्ष, डॉक्टर महिपाल एस सचदेवा, आईआईआरएसआई अध्यक्ष, डॉक्टर अमित तरफदार और आईआईआरएसआई के महासचिव, डॉक्टर अमर अग्रवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व की लगभग 30% नेत्रहीन आबादी भारत में है। विभिन्न देशों के हजारों प्रतिनिधियों ने नेत्र देखभाल के क्षेत्र में नई तकनीकों, इनोवेशन और प्रगति पर चर्चा करने के लिए इस सम्मेलन में भाग लिया। आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल 12 मिलियन लोग अंधेपन का शिकार हैं।
दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल, श्री अनिल बैजल ने बताया कि, “इस तरह के वार्षिक सम्मेलन एक प्रकार के अनूठे मंच की तरह होते हैं,
जहां हम आँखों के सभी मरीजों में ज्ञान प्राप्त करने, विचार साझा करने और सुधार करने को लेकर उत्साह को देख पाते हैं। मेक इन इंडिया पर इस कॉन्फ्रेंस में विचार-विमर्श के साथ बहुत से विदेशी चिकित्सा प्रोटोकॉल और विचारों की उत्पत्ति होगी, जोनेत्र देखभाल के स्वर्ण मानक बन जाएंगे। इस तकनीक को अपनाने के लिए अस्पतालों में नेत्र रोग विशेषज्ञों और तकनीशियों को प्रशिक्षित करना है।
आईआईआरएसआई के वैज्ञानिक समिति अध्यक्ष और सेंटर फॉर साइट के सीएमडी, डॉक्टर महिपाल एस सचदेवा ने बताया कि, “भारत में अंधेपन की समस्या के बोझ के अलावा लगभग 15% भारतीय आबादी इस प्रकार के अंधेपन और दृष्टि की समस्या से पीड़ित हैं जिसे ठीक किया जा सकता है। उद्योग और नेत्र विशेषज्ञ टेक्नोलॉजी की लागत कम करने और भारत की विशाल ग्रामीण आबादी को नेत्र देखभाल प्रदान करने के लिए एक आम बैठक की उम्मीद रखते हैं।” नेत्र संबंधी विकारों के उपचार में अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से न केवल इलाज आसान हो जाएगा बल्कि मरीज की रिकवरी में समय भी कम लगेगा, जिसके बाद वे अपने जीवन को खुलकर जी सकेंगे।

One thought on “आँखों की देखभाल के लिए हुई अत्याधुनिक एवं विदेशी चिकित्सा प्रोटोकॉल पर विचार”

Leave a Reply

Your email address will not be published.